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अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना: बॉयलर मेकर पाठ्यक्रम

पाठ्यक्रम का विवरण

यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिकाऊ उमेदवारी प्रोत्साहन योजना (NAPS) के तहत बॉयलर मेकर ट्रेड के लिए तैयार किया गया है। यह बॉयलर, दबाव पोत, और संबंधित धातु संरचनाओं के निर्माण, संयोजन, वेल्डिंग, स्थापना, परीक्षण, और रखरखाव में कौशल प्रदान करता है। प्रशिक्षण अवधि 2 वर्ष है, जिसमें मूल प्रशिक्षण और कार्यस्थल पर प्रशिक्षण शामिल हैं।

1. मूल प्रशिक्षण (Basic Training)

अवधि: 6-9 महीने
माध्यम: औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) या नियोक्ता का प्रशिक्षण केंद्र
उद्देश्य: बॉयलर निर्माण, वेल्डिंग, और सुरक्षा मानकों में आधारभूत कौशल प्रदान करना।

विषय:

  1. बॉयलर निर्माण का परिचय
    • बॉयलर मेकर की भूमिका और उद्योग में महत्व।
    • बॉयलर और दबाव पोत: प्रकार, अनुप्रयोग।
    • बॉयलर निर्माण सामग्री: हल्का स्टील, मिश्र धातु।
  2. उपकरण और तकनीक
    • हाथ और विद्युत उपकरण: ड्रिल, ग्राइंडर, कटिंग टॉर्च।
    • धातु निर्माण उपकरण: ब्रेक, रोल, शीयर।
    • माप और चिह्नन: टेप, कैलिपर, ज्यामितीय विकास।
  3. वेल्डिंग और कटिंग
    • मैनुअल मेटल आर्क वेल्डिंग (MMAW): हल्का स्टील।
    • गैस मेटल आर्क वेल्डिंग (GMAW) और गैस टंगस्टन आर्क वेल्डिंग (GTAW)।
    • थर्मल कटिंग: ऑक्सी-फ्यूल, प्लाज्मा कटिंग।
  4. निर्माण और संयोजन
    • ब्लूप्रिंट और तकनीकी चित्र पढ़ना।
    • धातु को आकार देना और काटना: गर्म और ठंडी विधियाँ।
    • बोल्टिंग, रिवेटिंग, और वेल्डिंग द्वारा संयोजन।
  5. सुरक्षा और मानक
    • कार्यस्थल सुरक्षा: PPE (हेलमेट, दस्ताने, चश्मा)।
    • उच्च जोखिम कार्य: मचान, सीमित स्थान।
    • भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और ASME मानक।
  6. रिगिंग और उत्थापन
    • रिगिंग उपकरण: स्लिंग, शैकल, क्रेन।
    • सामग्री उठाने और स्थानांतरित करने की प्रक्रियाएँ।
    • विंच और ब्लॉक सिस्टम का उपयोग।

मूल्यांकन:

  • लिखित परीक्षा: बॉयलर निर्माण, वेल्डिंग, सुरक्षा।
  • प्रैक्टिकल: वेल्डिंग, धातु निर्माण, रिगिंग।

2. कार्यस्थल पर प्रशिक्षण (On-the-Job Training)

अवधि: 15-18 महीने
माध्यम: नियोक्ता का कार्यस्थल
उद्देश्य: वास्तविक निर्माण और रखरखाव परियोजनाओं में बॉयलर निर्माण कौशल लागू करना।

कार्य:

  1. बॉयलर और दबाव पोत निर्माण: प्लेट, पाइप, शीट।
  2. वेल्डिंग कार्य: MMAW, GMAW, GTAW।
  3. स्थापना: बॉयलर, हीट एक्सचेंजर, टैंक।
  4. परीक्षण: रिसाव, दबाव, और दोष जाँच।
  5. रखरखाव और मरम्मत: पुराने बॉयलर और संरचनाएँ।
  6. रिगिंग और उत्थापन: क्रेन और होइस्ट संचालन।
  7. सुरक्षा अनुपालन: PPE उपयोग, खतरा पहचान।

मूल्यांकन:

  • कार्य प्रदर्शन: नियोक्ता द्वारा निर्माण गुणवत्ता।
  • प्रोजेक्ट: छोटा बॉयलर घटक या मरम्मत कार्य।
  • उपस्थिति: 80% न्यूनतम।

3. संबंधित निर्देश (Related Instructions)

उद्देश्य: सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावसायिक कौशल को मजबूत करना।

विषय:

  1. बॉयलर डिज़ाइन: दबाव पोत सिद्धांत, थर्मल दक्षता।
  2. उन्नत सामग्री: उच्च शक्ति स्टील, संक्षारण प्रतिरोध।
  3. नियामक ढांचा: बॉयलर अधिनियम, 1923; ASME कोड।
  4. सॉफ्ट स्किल्स: टीम समन्वय, समस्या समाधान।
  5. उद्योग प्रथाएँ: स्वचालित वेल्डिंग, डिजिटल निरीक्षण।
  6. नैतिकता: कार्यस्थल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण।

मूल्यांकन:

  • लिखित टेस्ट: बॉयलर डिज़ाइन, नियामक।
  • प्रस्तुति: सुरक्षा प्रथाएँ या निर्माण तकनीक।

4. अखिल भारतीय ट्रेड टेस्ट (AITT)

प्रवेश: प्रशिक्षण पूरा करने के बाद।
प्रारूप:

  • लिखित: बॉयलर निर्माण, वेल्डिंग, सुरक्षा।
  • प्रैक्टिकल: वेल्डिंग, संयोजन, दबाव परीक्षण।

परिणाम: उत्तीर्ण उम्मीदवारों को राष्ट्रीय शिकाऊ प्रमाणपत्र (NAC)।

5. प्रशिक्षण के अन्य पहलू

  • विद्यावेतन: ₹8,000-₹15,000/माह।
  • प्रशिक्षण सुविधाएँ: वेल्डिंग उपकरण, धातु निर्माण मशीनें, सुरक्षा गियर।
  • प्रमाणन: NAC, सरकारी नौकरियों में मान्य।
  • पंजीकरण: apprenticeshipindia.gov.in

6. पाठ्यक्रम के उद्देश्य

  • बॉयलर निर्माण और वेल्डिंग में दक्षता।
  • निर्माण उपकरण और सुरक्षा मानकों में विशेषज्ञता।
  • रखरखाव और नियामक अनुपालन में व्यावसायिकता।

7. नोट्स

  • योग्यता: 10वीं पास (विज्ञान और गणित वांछनीय)।
  • आयु: 14 वर्ष से अधिक।
  • संसाधन: dgt.gov.in